SANJAY MAURYA

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आज के दौर

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आज के दौर में ऐ दोस्त ये मंज़र क्यूँ है
ज़ख़्म हर सर पे हर इक हाथ में पत्थर क्यूँ है

जब हक़ीक़त है के हर ज़र्रे में तू रहता है
फिर ज़मीं पर कहीं मस्जिद कहीं मंदिर क्यूँ है

अपना अंजाम तो मालूम है सब को फिर भी
अपनी नज़रों में हर इन्सान सिकंदर क्यूँ है

ज़िन्दगी जीने के क़ाबिल ही नहीं अब "फ़ाकिर"
वर्ना हर आँख में अश्कों का समंदर क्यूँ है 
       (संजय मौर्या )
हिंदी साहित्य
भोजपुरी खबर

अगर व्यक्ति सुख का त्याग कर दे तो,दुःख कष्ट  नहीं देगा- संजय मौर्या

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हाल में हुए एक शोध के मुताबिक़, एवरेस्ट क्षेत्र सहित पूरे हिमालय की ऊंचाइयों पर नए पौधे उग रहे हैं.

शोधकर्ताओं ने बताया कि ये पौधे उन ऊंचाइयों पर बढ़ रहे हैं जहां वो पहले नहीं उगते थे.

शोधकर्ताओं ने 1993 से 2018 तक ट्री-लाइन और स्नो-लाइन के बीच वनस्पति के विस्तार को मापने के लिए उपग्रह डेटा का उपयोग किया.

इस शोध के नतीजे जर्नल ग्लोबल चेंज बायोलॉजी में प्रकाशित हुए हैं.

इस शोध का मुख्य विषय था सबनाइवल इलाके यानी उपनाइवल मेखला में उगने वाले पेड़ पौधों के बारे में जानकारी इकट्ठा करना. उपनाइवल मेखला ट्री-लाइन और स्नोलाइन के बीच के इलाक़े को कहते हैं, यानी बर्फ से ढकी जगह और पेड़ पौधे उग सकने वाली जगह के बीच की जगह.

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भारतीय संस्कृति

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धन्य भारतीय संस्कृति अपनी, प्रेम बहुत अधिकार नहीं है।
विकास, भला सबका चाहे जो, ऐसा दावेदार नहीं हैं।।

छुआछूत का भाव न रखती, धर्मों का सत्कार यहीं है।

ज्ञान भक्ति कर्मों का प्रांगण मेरा चारों धाम यही है।।
जहाँ गंगा-जमुना सरस्वती बहती हैं जिसके आँगन में।

तीन ओर सागर लहराता अडिग हिमालय प्रांगण में।। 


जग में ऊँचा रहे तिरंगा, भारत माँ का मान यही है।
जय-जय भारत देश हमारा, मेरा जीवन प्राण यही है।।
दूर देश में रहकर भी जो, राष्ट्र एकता प्रेम नहीं हैं।

लानत ऐसे जीवन को है वह सच्चा भारत वीर नहीं है।। 


                                                            (संजय मौर्या )

SANJAY MAURYA
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